Thursday, May 06, 2010

किरणें रवि की ...




सूरज की लाली,
सिमटी और बदली

रंगों की चादर
आकाश में बिखरी

दिन चढ़ता रूप बदलता,
भाग रही धूप बावरी

परछाइयों पर फिर भी
खोज रहीं कुछ किरणें रवि की ...

4 comments:

संजय कुमार चौरसिया said...

thodi sa likha
par umda likha

badhai

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

nilesh mathur said...

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ और भाव है !

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी बहुत सुंदर लिखा है.

M VERMA said...

परछाइयों पर फिर भी
खोज रहीं कुछ किरणें रवि की ...
सुन्दर बिम्ब दिया है

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