
मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार
दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार
-निदा फ़ज़्ली
इस तरह मेरे गुनाहों को धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है
ये ऐसा कर्ज है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है
-मुनव्वर राना
ऐ माँ तेरे चेहरे की झुर्रियों की क़सम
हर इक लकीर में जन्नत नज़र आती है
-अनवर ग़ाज़ी
हादसों से मुझे जिस शै ने बचाया होगा
वह मेरी माँ की दुआओं का साया होगा
-शम्स तबरेज़ी
घास में खेलता बच्चा पास बैठी माँ मुस्कुराती है
मुझे हैरत है क्यों दुनिया काबा-ओ-सोमनाथ जाती है
-अज्ञात