अपनी गृहस्थी में इस कदर व्यस्त रहने लगी कि ब्लाग पर मौन हो गई। ब्लागजगत तो हमेशा याद आता रहता है परंतु फुरसत के पल अब कीमती हो गए हैं। आपका प्यार पा कर बहुत खुशी होती है। पर मौन से कोई इस तरह जीत जाएगा यह नहीं पता था। पिछले तीन दिन से सोच रही हूँ कि यह पोस्ट लिख भेजूँ, आज समय निकाल ही लिया। 26 की रात को प्रिय बेजी का फोन आया। मौन जीत जाता है उन्होंने सहजता से दोहरा दी, मैने पूछा- पुरानी पोस्ट पढ़ने का समय कहाँ से चुरा लिया, बेजी। बेजी बोलीं पुरानी नहीं ये तो आज की पोस्ट है। मेरा माथा ठनका भई मुझे तो याद नहीं कि मैने अपनी पुरानी कविता फिर से डाली हो। माजरा समझ नहीं आया। उसी समय ब्लागवाणी खोला तो सबसे ज़्यादा पढ़े गए में अपना नाम पाया। देख कर खुशी तो हुई साथ में अचम्भा भी कि ये क्या हुआ। लिंक खोला तो देखा अजी मेरी ही कविता पर मुझसे पहले उड़न तश्तरी पहुँच गई, मीत, कुश का एक खूबसूरत ख्याल, विचारों की ज़मीं, डा. अनुराग, संदीप जी, शोभा जी सभी विराजे हैं। प्रतिक्रियाएँ इतनी अच्छी लगी कि दिल खुश हो गया। कविता को आप सभी ने बहुत सराहा, इससे भी ऊपर आपने मेरी भावनाओं को समझा। समीर जी मुझे भी नहीं पता कि बहुत पुरानी पोस्ट फिर से कैसे। मैं कम लिख पाती हूँ फिर भी आप सभी मुझे याद रखते हैं। पर मेरी समझ में नहीं आया कि ये मौन कैसे टूटा। मेरी 20 जुलाई 2006 की कविता आज अचानक कैसे उभर आई और पुरानी तारीख़ पर कमेंट्स कैसे मिल गये, क्या कहने इस मौन के। खूब दिमाग दौड़ाया पर यह रहस्य नहीं सुलझा। क्या आप लोग बता सकते हैं कि ये क्या हुआ?
किशोर का यह गाना मेरी हालत बयान कर सकता है- आप भी सुनिये और रहस्य सुलझा दीजिये-
http://www.esnips.com/doc/16603360-342d-430f-8b57-471a9c846066/06-Yeh-kya-hua
Wednesday, May 28, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


5 comments:
अर्बुदा जी; आपके द्वारा अपनी पोस्ट पर शीर्षक न देने के कारण ब्लागवाणी आपकी पोस्ट उठा नहीं पा रही थी. इस कारण आपकी इतनी अच्छी कविता हम लोग पढ़ नहीं पाये.
26 मई को ब्लागवाणी के नये संस्करण में ये कमी दूर कर दी गई इसलिये ब्लागवाणी ने आपकी इस पोस्ट को उठा लिया.
ओह, तो यह थी रहस्य की बात। दरअसल जब मैंने ब्लाग लिखना शुरु किया 2006 में तब ब्लागवाणी के बारे में नहीं पता था इसलिये शीर्षक की महत्ता भी नहीं मालूम चली।
ब्लागवाणी का नया संस्करण मेरे लिये बढ़िया रहा।
शुक्रिया।
अब तो रहस्योदघाटन हो गया. :)
कुल मिला कर ये तय हो गया की आपकी कविता यात्रा जारी रहेगी...
आपका मौन हमें पसंद नहीं है। मौन तोड़िए
Post a Comment