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Monday, July 18, 2011

हाईकु

(१)

प्रीत संवारे
पेड़ के कोटर में
निर्मित नीड़।


(२)
नदिया बहे
बूंद बूंद पानी ले
अस्तित्त्व थामे।


(३)
जीवन सारा
खिले चेहरों पर
खेल तमाशा।


(४)
दादी की गोद
ममता भरा स्पर्श
प्यारा बचपन।

(५)
पग रखना
संभल संभल के
जीवन पथ।


(६)
बोझ उठातीं
अनवरत चले
सांसे निश्छल।

Wednesday, May 14, 2008

हाईकु (त्रिपदम)


(1)

स्वर्णिम आभा
बिखेरे दिनकर
अतिसुन्दर।




(२)

पेड़ की जड़ें
माटी भीतर सींचे
जीवन डोर।


(३)

छोटा बालक
रंग और कल्पना
चित्र बनाता।

Sunday, February 03, 2008

हाईकु (त्रिपदम)

(1)
ढलती साँझ
नीड़ की तलाश में
भटके पंछी।



(2)
नदी का पानी
कल कल झरना
बहते हैं ना.






(3)
रुई के फाहे
बादलों पर छाए
वृक्ष नहाए.







(4)
भोर औ सांझ
करवट बदले
जीवन यही.

Sunday, October 28, 2007

करवाचौथ पर कुछ हाईकु



(1)
आया भाग्य से
सुहागनों का दिन
करवाचौथ।



(2)
रूप निखरे
सोलह श्रृंगार सा
सुहागन का।

(3)
माँग सिन्दूरी
कलाई भर चूड़ी
चाँद पूजती।




(4)
नारी जीवन
ममता और प्रेम
सौभाग्यशाली।

(5)
खुशियों भरा
जीवन हो सबका
यही प्रार्थना।
(सुबह ‘सरगी’ करते हुए कुछ हाईकु बने, जिन्हें यहाँ सभी के साथ बाँट रही हूँ।)

Wednesday, August 22, 2007

हाईकु

(मन में उठते हैं ढेरों ख्याल, उमड़ घुमड़ कर, इस बार हाइकु बन गए)


(1)
माटी समेटे
सागर की लहरें
सौंधी खुशबू ।

(2)
चाँदनी रात
नीम की छाँह तले
जलती आग ।

(3)
गरजे मेघ
भीग गया अंतर्मन
हवा है नम ।

(4)
उठा गगरी
थाम ले ये सागर
मेघ चंचल ।


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